हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,अल अजहर विश्वविद्यालय, मिस्र की अनुसंधान मामलों और फत्वा की जिम्मेदार संस्था, मोअस्सेह मेहराब ने हाल ही में एक बयान जारी किया है और कहा है कि इज़राईल और अमेरिकी हमलों के मुकाबले में ईरान की मदद करना सभी मुसलमानों पर वाजिब है।
इस बयान में कहा गया है कि इस संस्थान का बयान शरई सिद्धांतों जैसे समर्थन और विरोध पर आधारित है।
इस बयान में आगे कहा गया है,काफिरों के मुकाबले में हर मुसलमान की मदद करना अन्य सभी मुसलमानों का कर्तव्य है। ऐसी परिस्थितियों में काफिरों का साथ देना या उनके अतिक्रमणों को सही ठहराना हराम है।
मोअस्सेह मेहराब के प्रमुख मुफ्ती सलामा अब्दुल-कवी ने भी सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी करते हुए शहीद क्रांतिकारी नेता के बारे में कहा,उन्होंने शहादत की दुआ की, हमारे क़िबले (मक्का) की ओर रुख करके नमाज़ पढ़ी, माह-ए-रमज़ान में रोज़ा रखा, हमारे पवित्र स्थलों की आज़ादी के लिए हमारे दुश्मन से लड़ते हुए इस्लाम की अवस्था में शहादत पाई।
यदि फिर भी आप उन्हें काफ़िर कहना चाहते हैं, तो आप जानें, लेकिन जान लें कि इसका हिसाब देना होगा। अल्लाह सर्वशक्तिमान शहीद सैयद अली खामेनेई पर अपनी रहमतें नाज़िल फरमाए।
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